Sunday October 22,2017
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संस्कारधाम विद्यापीठ गुङामालानी में आपका स्वागत है ।

विद्यालय का उद्देश्य : नये भारत को अविलम्ब एक ऐसी शिक्षा पद्धति की आवश्यकता है जो नये समाज के लिये मानसिक व शारीरिक दृष्टियों से स्वस्थ नागरिको का निर्माण कर सके| बालको को उनके समुचित व सर्वांगीण विकास के लिये सम्पूर्ण सुविधाएं तथा अवसर देकर बचपन से ही उनमे सुन्दर स्वभाव, आत्मनिर्भरता, स्वानुशासन, स्वस्थ एवं संयमित विचारधारा आदि का समावेश करना, निडरता, साहस व उत्साह आदि गुण जाग्रत करना, ताकि भविष्य में वे अपने देश के सुयोग्य नागरिक बन सके, यही इस संस्था का परम लक् है|

कैसा निर्माण: हमे ऐसे बालको का निर्माण है जिनके चेहरों पर आभा, शरीर में बल, मन में प्रचण्ड इच्छा शक्ति, बुद्धि में पाण्डित्य, जीवन में स्वावलम्बन, हृदय में शिवा, प्रताप, ध्रुव, प्रहलाद की जीवन गाथाऐ अंकित हों और जिन्हे देख कर महापुरुषों की स्मृतियां झंकृत हो उठे |



निदेशक की कलम से

सादर प्रणाम गुड़ामालानी क्षैत्र के निवासियों सूचित करते हुए अत्यन्त हर्ष हो रहा है कि आपके शहगुड़ामालानी में स्थित संस्कारधाम विद्यापीठ उ. मा. वि. का सत्र 2011 से 2014 तक लगातार बोर्ड परीक्षापरिणाम मात्रात्मक व गुणात्मक दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ रहा है | ढाणियों, गावों के कमज़ोर विधार्थियों को प्रवेश देकर कठिन मेहनत से श्रेष्ठतम परिणाम दिया है | गुड़ामालानी में शिक्षा के क्षैत्र मेंसंस्कारधाम विद्यापीठ महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है| जिसमे आपका सहयोग अपेक्षित है| विद्यालय मेंकला तथा विज्ञान संकाय खुल गया है यह इस क्षैत्र के लिए ख़ुशी की बात है क्योकि स्थानीय विद्यार्थियों को दूर जाने आवश्यकता नहीं है|
विद्यालय का उद्देश्य : नये भारत को अविलम्ब एक ऐसी शिक्षा पद्धति की आवश्यकता है जो नये समाज के लिये मानसिक व शारीरिक दृष्टियों से स्वस्थ नागरिको का निर्माण कर सके| बालको को उनके समुचित व सर्वांगीण विकास के लिये सम्पूर्ण सुविधाएं तथा अवसर देकर बचपन से ही उनमे सुन्दर स्वभाव, आत्मनिर्भरता, स्वानुशासन, स्वस्थ एवं संयमित विचारधारा आदि का समावेश करना, निडरता, साहस व उत्साह आदि गुण जाग्रत करना, ताकि भविष्य में वे अपने देश के सुयोग्य नागरिक बन सके, यही इस संस्था का परम लक् है|
हमे ऐसे बालको का निर्माण है जिनके चेहरों पर आभा, शरीर में बल, मन में प्रचण्ड इच्छा शक्ति, बुद्धि में पाण्डित्य, जीवन में स्वावलम्बन, हृदय में शिवा, प्रताप, ध्रुव, प्रहलाद की जीवन गाथाऐ अंकित हों और जिन्हे देख कर महापुरुषों की स्मृतियां झंकृत हो उठे | विशेषतौर पर छात्राओं के लिये घर बैठे गंगा आई| मैं अनुभव कर रहा हूँ कि गुड़ामालानी अब शिक्षा के क्षैत्र में विकास की ओर अग्रसर है.धन्यवाद ||